128वां शक्ति चेतना जनजागरण शिविर, बिलासपुर, 10-11 फ़रवरी 2024

‘शक्ति चेतना जनजागरण शिविर’ समग्र समाज को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, परोपकारी व पुरुषार्थी बनाने का माध्यम है। जब लोग पूर्ण नशामुक्त होंगे, मांसाहारमुक्त होंगे, चरित्रवान् होंगे, चेतनावान् होंगे, पुरुषार्थी होंगे, परोपकारी होंगे, तभी ऋषियों की पावन भारतभूमि अपने सनातनधर्म के पूर्णस्वरूप को प्राप्त कर सकेगी। ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा एक के बाद एक किये गए शक्ति चेतना जनजागरण शिविरों और नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्राओं के सुयोग का ही प्रतिफल है कि हमारे भारत देश में चहुंओर परिवर्तन की लहर चल चुकी है। शिविरों के क्रम में दिनांक 10-11 फ़रवरी 2024 को बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 128वें शक्ति चेतना जनजागरण शिविर का विशाल कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। ऋषिवर का कथन है कि “यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक कि सम्पूर्ण समाज आत्मिकचेतना से परिपूर्ण नहीं होजाता तथा अनीति-अन्याय-अधर्म, भ्रष्टाचार, अत्याचार व व्याप्त व्यभिचार, समूलरूप से नष्ट नहीं होजाते।“

दिनांक 09 फ़रवरी 2024 की प्रात:कालीन बेला

आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की आरती व ध्यान-साधना के उपरान्त, सच्चिदानंदस्वरूप सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज प्रात: 07:30 बजे जैसे ही छत्तीसगढ़ राज्य के जि़ला-बिलासपुर हेतु पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम से प्रस्थित हुये, आश्रमवासियों व भक्तों के जयकारों और शंखनाद से वातावरण तरंगित हो उठा। गुरुवरश्री के वाहन के पीछे पूजनीया शक्तिमयी माता जी और शक्तिस्वरूपा बहनों का वाहन चल रहा था तथा उनके पीछे अनेक वाहनों में शिष्यगण चल रहे थे।

वाहन से ही आश्रमवासियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुये सद्गुरुदेव जी महाराज सर्वप्रथम स्वामी श्री रामप्रसाद आश्रम जी महाराज की समाधिस्थल पर गये, पश्चात् त्रिशक्ति गौशाला पहुंचे, जहाँ उन्हें नमन् करने के लिये तोरणद्वार सजाए गोसेवक कतारबद्ध जयकारे लगाते व शंखध्वनि करते हुये खड़े थे, इन्हें आपश्री ने आशीर्वाद प्रदान किया।

नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा धीरे-धीरे शहडोल मार्ग पर आगे बढ़ी। परम पूज्य गुरुवरश्री की यात्रा का आभास पाकर ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में स्थान-स्थान पर शिष्यों-भक्तों के द्वारा स्वागतद्वार सजाये गये थे। स्वागतद्वारों के दोनों ओर आरती की थाल सजाये खड़े भक्तों की आतुरता देखते ही बनती थी। खामडाड़ पंचायत, ब्यौहारी, जयसिंहनगर, खन्नौधी व गोहपारू में स्वागतद्वार के दोनों ओर खड़े गुरुभाई-बहनों व ग्रामवासियों ने यात्रा का स्वागत जयकारों व शंखनाद करके किया। सद्भावना यात्रा दियापीपर पहुंची। यहाँ शहडोल, सोहागपुर के गुरुभाई अनेक दोपहिया वाहनों से यात्रा की अगवानी के लिए पहुँचे हुए थे। शनै:-शनै: यात्रा आगे बढ़ी। सद्भावना यात्रा का ग्राम-छतवई और पिपरिया में भी परम पूज्य गुरुवरश्री के शिष्यों-भक्तों व ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा करके भव्य स्वागत किया। यात्रा जैसे ही शहडोल जि़ले के वार्ड क्रमांक-01, कोनी तिराहे पर पहुँचती है, ‘माँ’ -गुरुवर के जयकारों व शंखध्वनि से समूचा क्षेत्र गूंज उठा। मार्ग के दोनों ओर गुरुभाई-बहनों, ‘माँ’  के भक्तों व अनुशासनपूर्वक करबद्ध खड़े बच्चों के चेहरों में अपार प्रसन्नता झलक रही थी। गुरुवरश्री ने वाहन से ही सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। तत्पश्चात् बाईपास मार्ग से बुढ़ार, अमलाई, चचाई होते हुए सद्भावना यात्रा अनूपपुर पहुँची। सभी स्थानों पर भक्तों ने यात्रा का स्वागत किया। जैतहरी में भक्तों ने शंखध्वनि व जयकारों के साथ सद्गुरुदेव भगवान् को नमन-वन्दन किया। व्यंकटनगर में भव्य स्वागतद्वार बना हुआ था और गुरुभाई-बहन सड़क मार्ग के किनारे जयकारे लगाते हुए खड़े थे, महिलाओं के हाथों में दीपप्रज्ज्वलित कलश, सभी ने परम पूज्य गुरुवरश्री का दर्शनलाभ प्राप्त करने के साथ ही आशीर्वाद प्राप्त किया। 

  व्यंकटनगर से मध्यप्रदेश की सीमा समाप्त होकर छत्तीसगढ़ की सीमा प्रारम्भ हुई। व्यंकटनगर से गौरेला होते हुए यात्रा पेण्ड्रा पहुँची। मार्ग के किनारे कतारबद्ध खड़े भक्त ‘माँ’ -गुरुवर के जयकारे लगाने के साथ ही अंजुलि में भरकर पुष्प की वर्षा कर रहे थे। महिला भक्तों एवं बच्चियों के हाथ में दीपप्रज्ज्वलित कलश शोभायमान हो रहे थे। सुसज्जित स्वागतद्वारों की अलग ही छटा थी। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने सभी शिष्यों-भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। ग्राम-कारीआन, केंदा होते हुए यात्रा रतनपुर पहुँची, इन सभी स्थानों पर करबद्ध खड़े प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की बालसुलभता अत्यन्त ही मनमोहक थी। ग्रामवासी सद्गुरुदेव भगवान् से आशीर्वाद प्राप्त करके अतिउत्साहित दिखे और पैदल ही जयकारे लगाते हुए कुछ दूर तक सद्भावना यात्रा का साथ दिया। 

सद्भावना यात्रा के साथ परम पूज्य गुरुवरश्री, पूजनीया शक्तिमयी माता जी व शक्तिस्वरूपा बहनों को देखकर ग्राम-कोनी, बिलासपुर के लोगों में उत्साह का पारावार नहीं था। सभी ने गुरुवरश्री को नमन, वन्दन करके आशीर्वाद प्राप्त किया। बिलासपुर में जगह-जगह स्वागतद्वार व वन्दनवार सजाए गए थे। महामाया चौक, नेहरू चौक, अम्बेडकर चौक, सत्यम चौक और अग्रसेन चौक पर नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा का स्वागत, शंखध्वनि व पुष्पवर्षा करके किया गया। 

अग्रसेन चौक से नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा बिलासपुर स्थित हॉटल श्री श्याम इण्टरनेशनल (गुरुआवास) के पास पहुंचकर समाप्त हुई। यहाँ पर भी गुरुभाई-बहनों व क्षेत्रीय भक्तों ने जयकारों, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा करके परम पूज्य गुरुवरश्री की अगवानी की।

शिविर के प्रथम दिवस का प्रथम सत्र, शिविर का विशाल प्रांगण अपार जनसमुदाय से भरा हुआ था। शक्तिस्वरूपा बहनों के सान्निध्य में सभी भक्तों ने बीजमन्त्रों ‘माँ’ -ॐ  का पाँच-पाँच बार उच्चारण करने के उपरान्त योग-ध्यान-साधना के क्रमों को पूर्ण किया।           

योग के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए शक्तिस्वरूपा बहन संध्या दीदी जी ने कहा कि नित्यप्रति योगासन करने से शरीर व मन-मस्तिष्क स्वस्थ रहता है और स्वस्थ मनुष्य ही अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन अच्छी तरह से कर सकता है। योगपथ पर चलने के लिए योग के प्रति पूर्ण निष्ठा, विश्वास और समर्पण की आवश्यकता होती है। योग के माध्यम से हमारी कोशिकाएं चैतन्य होती हैं। बहन संध्या दीदी जी ने सरल शब्दों में योग के विभिन्न आसनों के बारे में जानकारी दी।

06 हजार से अधिक नए भक्तों ने ली गुरुदीक्षा

शिविर के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में 07.30 बजे से गुरुदीक्षा का क्रम प्रारम्भ हुआ। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने 06 हजार से अधिक नए भक्तों को दीक्षा प्रदान करने से पूर्व आशीर्वाद प्रदान करते हुए चिन्तन दिया कि “मानवजीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षण वह होता है, जब किसी चेतनावान् गुरु से दीक्षा प्राप्त होती है। इस धरती पर अनेक रिश्ते हैं, परन्तु गुरु और शिष्य का रिश्ता भौतिक जगत् के रिश्तों से अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। यह आत्मा से आत्मा के मिलन का रिश्ता होता है। हर पल गुरु अपने शिष्य का कल्याण चाहता है। दुनिया के सभी रिश्ते आदान-प्रदान के होते हैं, लेकिन एक चेतनावान् गुरु अपने शिष्य से कुछ नहीं चाहता है। गुरु केवल अपने शिष्यों के अवगुण चाहता है कि वह अपने अवगुण उसे समर्पित करदें और सत्यपथ के, अध्यात्मिकपथ के राही बनें।

पहले आपका जीवन कैसा था, यह भुला दें और अब से नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारी जीवन अंगीकार करें। अपने हृदय को इतना विराटस्वरूप दो कि तुम्हारे हृदय में हर समय आत्मा, गुरुसत्ता और परमसत्ता का वास हो। गुरु और परमसत्ता का हरपल स्मरण रखो। मैं अपनी चेतनातरंगों के माध्यम से कब, किसे, कहाँ लाभ पहुंचाना है, पहुंचा देता हूँ, केवल अपनी पात्रता को विकसित करने की जरूरत है।“

गुरुवरश्री ने नित्य साधना के मंत्रों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भले ही प्रदान किए जा रहे मन्त्रों को आपने कई बार सुना है, लेकिन जब गुरु के द्वारा मन्त्र प्रदान किया जाता है, तो वे मन्त्र उत्कीलित होजाते हैं।“

   चिन्तन के पश्चात् सद्गुरुदेव जी ने सहायक शक्तियों हनुमान जी का मंत्र-ॐ  हं हनुमतये नम:, भैरव जी का मंत्र-ॐ  भ्रं भैरवाय नम: एवं गणेश जी का मन्त्र-ॐ  गं गणपतये नम: के साथ चेतनामन्त्र-ॐ  जगदम्बिके दुर्गायै नम: और गुरुमन्त्र-ॐ  शक्तिपुत्राय गुरुभ्यो नम: प्रदान करते हुये कहा कि मैं सभी को मन, वचन, कर्म से शिष्य रूप में स्वीकार करता हूँ | 

 दीक्षा ग्रहण करने के उपरान्त शिष्यों ने संकल्प लिया कि ‘मैं…आज इस साधनात्मक शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में मन-वचन-कर्म से दृश्य एवं अदृश्य जगत् की समस्त शक्तियों, दसों दिशाओं, पंचतत्त्वों तथा उपस्थित जनसमुदाय को साक्षी मानते हुए संकल्प करताध्करती हूँ कि मैं बह्मर्षि धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज को अपना धर्मगुरु स्वीकार करताध्करती हूँ । परम पूज्य सद्गुरुदेव जी को साक्षी मानकर संकल्प करताध्करती हूँ कि मैं जीवनपर्यन्त नशा-मांसाहारमुक्त व चरित्रवान् जीवन जीने के साथ ही परम पूज्य सद्गुरुदेव जी के हर आदेश का पूर्णतया पालन करूंगा/करूंगी तथा गुरुदेव जी के द्वारा मानवता की सेवा, धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा के लिए प्रदत्त तीनों धाराओं के प्रति पूर्णरूपेण समर्पित रहते हुए तीनों धाराओं से मिलने वाले हर आदेश का पालन करूंगा/करूंगी। मैं भगवती मानव कल्याण संगठन के नियमों-निर्देशों का पालन करने के साथ ही भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम के प्रति तन-मन-धन से पूर्णतया समर्पित रहूँगा/रहूंगी एवं संगठन के जनकल्याणकारी कार्यों में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ सहभागी बनूँगा/बनूँगी ’ |

अन्त में सभी नये शिष्यों ने सद्गुरुदेव जी महाराज को श्रद्धाभाव से नमन करते हुये विघ्रविनाशक शक्तिजल नि:शुल्क  प्राप्त किया।

शक्ति चेतना जनजागरण शिविर के विशाल आयोजन को सम्पन्न कराने में भगवती मानव कल्याण संगठन के हजारों कार्यकर्ता एक सप्ताह पूर्व से दिन-रात जुटे रहे। यह उनकी सक्रियता और सतर्कता का ही परिणाम था कि शिविर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं के ठहरने हेतु जहाँ आवासीय व प्रवचन पंडाल की व्यवस्था प्रदान की, वहीं शिविर के दोनों दिवस सुबह-शाम लाखों भक्तों को नि:शुल्क  भोजन कराया। पाँच हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के द्वारा जनसम्पर्क कार्यालय, खोया-पाया विभाग, नि:शुल्क  प्राथमिक उपचार केन्द्र, सोशल मीडिया कार्यालय, स्टॉल व्यवस्था और शांति व्यवस्था के साथ ही प्रवचन पण्डाल व्यवस्था, आवासीय पण्डाल व्यवस्था व प्रसाद वितरण के कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। इसके लिये संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं की जितनी भी प्रशंसा की जाये, कम होगी।

पत्रकार वार्ता

दिनांक 12 फ़रवरी को हॉटल श्री श्याम इण्टरनेशनल (गुरुआवास) पर आहूत पत्रकार वार्ता में पत्रकारों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि “देश को नशामुक्त बनाने के लिए सरकारों से कई बार कहा जा चुका है, भगवती मानव कल्याण संगठन के द्वारा प्रदेश व जि़लास्तर पर शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन सरकारों का कहना है कि इससे भारी राजस्व की प्राप्ति होती है, जिससे कई योजनाएं चलाई जा रही हैं! सरकारों को यह नहीं मालूम कि आमजनमानस को योजनाओं से जितना लाभ नहीं पहुंच रहा है, उससे अधिक नशे की विभीषिका के कारण देश को क्षति पहुँच रही है।हमारे द्वारा नशामुक्ति के लिए जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही नशामुक्ति जनान्दोलन चलाया जा रहा है। भगवती मानव कल्याण संगठन एवं भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा इस जनान्दोलन के तहत पन्द्रह सौ से अधिक स्थानों पर अवैध शराब की खेपें पकड़ाई जा चुकी हैं और यह अभियान सतत जारी है।“

गुरुवरश्री ने कहा कि “हर मनुष्य के तीन मुख्य कर्त्तव्य हैं- मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा। समाज को इन मानवीय कर्त्तव्यों का बोध कराने के लिए तीन धाराओं के तहत कार्य किया जा रहा है। जब सरकारों को मानवीय कर्त्तव्यों का बोध नहीं हुआ, तब हमारे द्वारा भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का गठन किया गया और पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीने हेतु तथा मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा के लिए उठ खड़े होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। धर्मगुरु होने के नाते मेरा कर्त्तव्य बनता है समाज को जागरूक करना।“

वापसी यात्रा बिलासपुर से सिद्धाश्रम तक

दिनांक 13 फरवरी, मंगलवार को प्रात:काल 07:30 बजे ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज जैसे ही हॉटल श्री श्याम इण्टरनेशनल (गुरुआवास) से बाहर निकलते हैं, शिष्यों व ‘माँ’  के भक्तों के मुखारविन्दों से उच्चारित जयकारों और शंखनाद की प्रतिध्वनि से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

 बिलासपुर जि़ला मुख्यालय होते हुए शहडोल जि़ले के ब्यौहारी अनुविभाग क्षेत्र में स्थापित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम तक वापिसी नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना यात्रा के दौरान सड़क मार्ग पर पड़ने वाले नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज के दर्शन हेतु उमड़े भक्तों की आतुरता का वर्णन करना सहज नहीं है।

बिलासपुर जि़ला मुख्यालय की सीमा कोनी में मार्ग के दोनों ओर खड़े क्षेत्रीय भक्तों, गुरुभाई-बहनों व नगरवासियों ने परम पूज्य गुरुवरश्री को नमन् करते हुए सद्भावना यात्रा को भावभीनी विदाई दी। यात्रा रतनपुर और केंदा होते हुए पेण्ड्रा पहुँची, जहाँ गुरुवरश्री के दर्शन हेतु गुरुभाई-बहन व क्षेत्रीयजन पंक्तिबद्ध जयकारे लगाते हुए खड़े थे। सभी को परम पूज्य गुरुवरश्री ने आशीर्वाद प्रदान किया। यात्रा पेण्ड्रा रोड गौरेला में स्थित पी.डब्ल्यू.डी. रेस्ट हाउस में कुछ समय के लिए रुकी और वहाँ सभी सद्भावना यात्रियों ने जलपान किया। वहाँ से 11 बजे यात्रा आगे बढ़ी और व्यंकटनगर होते हुए जैतहरी पहुँची। सद्गुरुदेव जी महाराज के वहाँ पहुंचते ही जयकारों के बीच महिला भक्तों ने आरती उतारकर और पुष्पसमर्पित करके अगवानी की। सभी लोग आशीर्वाद की आकांक्षा में वाहन को छूकर ही तृप्त हो रहे थे। अनूपपुर में यात्रा का स्वागत जगह-जगह किया गया। मेड़ियारास के पास भी शिष्यों-भक्तों ने ‘माँ’ -गुरुवर के जयकारे लगाकर यात्रा का स्वागत किया।

 अमलाई में शिष्यों-भक्तों ने परम पूज्य गुरुवरश्री की आरती उतारकर उन्हें नमन किया। महिलाओं का श्रद्धाभाव देखकर प्रतीत हो रहा था कि अध्यात्म की ओर नारीशक्ति का रुझान बढ़ रहा है। यात्रा बुढ़ार बाईपास मार्ग से शहडोल होते हुए ग्राम पिपरिया पहुंची। यहाँ पर शहडोल, सोहागपुर और ग्राम-पिपरिया के वासियों का हुजूम उमड़ पड़ा था। सभी शिष्यों-भक्तों ने गुरुवरश्री को नमन किया। ग्राम-पिपरिया में यात्रा कुछ समय के लिए रुकी, जहाँ गुरुवरश्री के शिष्य के निवास पर जलपान का प्रबन्ध किया गया था। इस तरह ग्राम पिपरिया से गोहपारू, जयसिंहनगर व ब्यौहारी होते हुए सायं 05:30 बजे पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पहुंचकर सद्भावना यात्रा का समापन हुआ।           

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