126वाँ शक्ति चेतना जनजागरण महाशक्ति शंखनाद’द्वितीय चरण’ प्रयागराज, 25-26 फ़रवरी 2023
‘महाशक्ति शंखनाद’ चेतनात्मकशक्ति के विकास का द्योतक तो है ही, साथ ही अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध उठ खड़े होने का आगाज है। धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के सान्निध्य में परेड ग्राउण्ड, संगम, प्रयागराज (उ.प्र.) में एक लाख से अधिक शिष्यों-भक्तों व धर्मयोद्धाओं के द्वारा किये गये ‘महाशक्ति शंखनाद’ की प्रतिध्वनि से सम्पूर्ण नभमंडल गुंजायमान हो उठा।
25-26 फ़रवरी 2023 को आयोजित द्विदिवसीय शक्ति चेतना जनजागरण शिविर, ‘महाशक्ति शंखनाद’ (द्वितीय चरण) में देश-विदेश से पहुंचे सद्गुरुदेव जी महाराज के लाखों शिष्य व माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा के भक्तों ने शंखनाद करके स्वयं में एक अलौकिक चेतना के स्फुरण का आभाष किया। गुरुवरश्री के सान्निध्य में लाखों लोगों के द्वारा किए गए शंखनाद की ध्वनि से वातावरण ओज से दीप्त हो उठा था। ग्रीष्मऋतु के आगमन के साथ ही स्वयं में अलौकिक ऊर्जा का संचार होने से, शिविर में शामिल सभी धर्मयोद्धाओं का शरीर रह-रहकर रोमांचित हो रहा था।
माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा और सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के प्रति भक्तों की श्रद्धा का प्रवाह, परेड ग्राउण्ड, संगम, प्रयागराज के विशाल क्षेत्र में उमड़ा पड़ रहा था। अपार जनसमुदाय, लाखों की संख्या में पुरुष, महिलाएं, बालक, बालिकाएं और सद्गुरुदेव जी महाराज के शिष्य, ‘माँ’ के भक्त शंख व शक्तिदण्डध्वज लिये भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय शक्ति चेतना जनजागरण शिविर प्रवचन पंडाल की ओर अनुशासनपूर्वक चले जा रहे थे। प्रवचन पंडाल में नशामुक्त, मांसाहारमुक्त व चरित्रवान् साधक जिस क्रम से पहुंचते, संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा दी गई व्यवस्था के अनुरूप पंक्तिबद्ध रूप से बैठते चले गये।
संगठन के कलाकार सदस्यों के द्वारा निर्मित प्रवचन मंच की भव्यता अद्वितीय थी। मंच के शीर्ष में शंख, नीलिमायुक्त आकाशीय मनभावन रंग के साथ लाल, पीला, गुलाबी, सफेद, कत्थई और हरा, ये सभी सप्तरंग इन्द्रधनुषी छटा की तरह शोभा बिखेर रहे थे। बांयी ओर गोल चक्र में कलश और दाहिनी ओर ‘माँ’और गुरुवर की संयुक्त ऊर्जात्मक छवि के समक्ष प्रज्वलित अखण्ड ज्योति तथा मध्य में विशाल यमुनापुल एवं प्रवाहित यमुना नदी का सजीव चित्रण किया गया था और मंच पर प्रज्जवलित अखण्ड ज्योति से निकलती तरंगें उपस्थित जनसमुदाय को विशेष ऊर्जा प्रदान कर रही थीं।
मंच के समक्ष शिविर पंडाल में अनुशासित ढंग से पंक्तिबद्ध बैठे हुये लाखों भक्तों की बेचौनी, आतुरता देखते ही बनती थी, कि तभी अपराह्न 01:30 बजे धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का आगमन भक्तों को शीतलता प्रदान करता चला गया। गुरुवरश्री के आगमन के साथ ही शंखध्वनि व तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

ऋषिवर के मंचासीन होते ही शक्तिस्वरूपा बहन पूजा, संध्या और ज्योति दीदी जी ने उपस्थित समस्त भक्तों की ओर से पदप्रक्षालन के बाद श्रीचरणों में पुष्प समर्पित किया। चरण वन्दन के पश्चात् गीत-संगीत की प्रतिभा के धनी शिष्यों ने भावसुमन प्रस्तुत किये, जिसके प्रारभिक अंश इस प्रकार हैं-
धन्य हमारे भाग्य जो छाया मिली गुरुवर की,…- बाबूलाल जी, दमोह-म.प्र.। धर्मप्रमुखों सुनो सबका आवाहन है, तप के बल की चुनौती ससम्मान है- सौरभ द्विवेदी जी, सिद्धाश्रम। तुम्हें जिन्दगी ख़ुद बनानी पड़ेगी, शरण सद्गुरु की जाकर तो देखो- वीरेन्द्र दीक्षित जी, दतिया। परिवर्तन की इस बेला में सब मिलजुलकर आओ, सत्यधर्म के पथ पर भइया आगे कदम बढ़ाओ। जातिपाति और ऊँच-नीच के भेद सभी बिसराओ, सत्यधर्म के पथ पर भइया अपने कदम बढ़ाओ- शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी।
भावगीतों की शृंखला समाप्त होते ही सभी शिविरार्थी भक्तों ने विशेष चेतनात्मकशक्ति के आधान हेतु पाँच-पाँच बार बीजमंत्र ‘माँ-ॐ’ का क्रमिक उच्चारण किया कि तभी सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के श्रीमुख से ‘माँ’की स्तुति प्रवाहित हो उठती है-
“माता स्वरूपम् माता स्वरूपम्,
देवी स्वरूपम् देवी स्वरूपम्।
प्रकृति स्वरूपम् प्रकृति स्वरूपम्,
प्रणम्यम्, प्रणम्यम्, प्रणम्यम्, प्रणम्यम्।।“
सभी की अन्तर्भावना को जानने वाले सद्गुरुदेव भगवान् अपने चेतनाअंशों, ‘माँ’ के भक्तों और उपस्थित श्रद्धालुओं तथा विश्वजनमानस को आशीर्वाद प्रदान करते हुये कहते हैं कि –

“प्रयागराज, जो सभी तीर्थों का राजा है और जहाँ गंगा-यमुना, सरस्वती मिलती हैं तथा जहाँ तीनों धाराओं का संगम होता है, उस स्थान को त्रिवेणी कहा जाता है और जहाँ त्रिवणी है, वहीं पूर्णत्व होता है। इस प्रयागराज में अनेक ऋषियों-मुनियों ने तपस्या की है, त्रिवेणी में स्नान किया है। मैं स्वयं इस धरती को नमन करता हुआ, सिद्धाश्रम को नमन करता हूँ। वह सिद्धाश्रम, जहाँ विगत 26 वर्षों से अनन्तकाल के लिए सतत श्री दुर्गाचालीसा का पाठ चल रहा है, जहाँ पर करोड़ों-करोड़ लोग पहुँचकर मातेश्वरी दुर्गा जी के गुणगान का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। सिद्धाश्रम में पवित्र गोशाला स्थापित है, मेरे पूज्य पिता दण्डी संन्यासी स्वामी श्री रामप्रसाद जी की समाधि स्थापित है। पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम परिक्षेत्र की सुरक्षा बाबा दानबीर कर रहे हैं और उस क्षेत्र का, उस स्थल का आज तक कोई दुरुपयोग नहीं कर सका, क्योंकि वह स्थल तो मेरे लिए मानवता के कल्याणार्थ सुरक्षित था। उस धर्मधुरी पर, उस पवित्रस्थल पर कुछ क्षण व्यतीत करके ही शांति प्राप्त की जा सकती है।
उत्तरप्रदेश मेरी जन्मस्थली है और प्रयागराज में शिविर के लिए मेरा विशेष चिन्तन था, लेकिन मैं विशेष अवसर की प्रतीक्षा में था। यहाँ मैं वह शिविर देना चाहता था, जिससे माता आदिशक्ति जगत् जननी का रिश्ता जुड़ जाए। ऋषि भारद्वाज मेरे इस जन्म के कुल ऋषि हैं और मैंने ब्राह्मण परिवार में फ़तेहपुर ज़िले में जन्म लिया। इस क्षेत्र से मेरा बहुत पुराना रिश्ता है। शिविरों में मेरे द्वारा चेतनात्मक चिन्तन दिए जाते हैं, जो धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा और मानवता की सेवा से जुड़े होते हैं। सभी ग्रन्थों का मूल सार है मानवता का कल्याण और चिन्तनों के माध्यम से समाज को इसी दिशा में बढ़ाया जा रहा है। मेरे द्वारा अपने हर मंच से कहा जाता है कि हर मनुष्य के तीन ही मूल कर्त्तव्य हैं और वे हैं- धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा और मानवता की सेवा करना। चाहे उसने किसी भी जाति, धर्म में जन्म लिया हो।
सत्यता की राह पर चलें हर धर्म के लोग
मेरे सनातनधर्म में, मेरे हिन्दुत्व में सभी धर्म समाहित हैं। वर्तमान समय में कुछ धर्म के अनुयायी दिशाहीन हो गए हैं। हर धर्म के लोग सत्यता की राह पर चलें और असत्य की राह पर चलने वालों को मुँह की खानी पड़े, इस दिशा में भगवती मानव कल्याण संगठन सतत कार्य कर रहा है। हमारा धर्म, हमारी जाति अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारी आत्मा की जननी एक ही हैं और वे हैं माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा। जिस मानवजीवन को प्राप्त करने के लिए देवता भी तरसते हैं, उस अमूल्य जीवन को प्राप्त करके आप लोग दीन-हीन, असमर्थता का जीवन जी रहे हैं! इसलिए कि आपने अपने अन्तरतम में झांका ही नहीं। ऋषियों-मुनियों ने अपने तपबल का अहसास कराया है, जिनमें नए स्वर्ग की रचना करने की, असम्भव से असम्भव कार्य को करने की क्षमता थी। इन्द्र का वज्र महर्षि दधीचि की हड्डियों से बना था, जिससे असुरों का संहार हुआ। इसी देश की नारियों ने देवाधिदेवों को बालक बनाकर पालने में झुलाया है, सूर्य की गति को रोक दिया है। यह है हमारा सनातनधर्म, जो अलौकिक ऊर्जा से भरपूर है और जिसकी तुलना अन्य धर्मों से की ही नहीं जा सकती। आज उसी सनातनधर्म की दिशा को कुछ स्वार्थीतत्त्वों के द्वारा भटकाव के रास्ते पर मोड़ा जा रहा है।
माताओं, बहनों को जागने की जरूरत है
सनातनधर्म की गणना पंथों से नहीं की जा सकती। सनातनधर्म जैसी ताकत किसी भी अन्य धर्म में नहीं है। ध्रुव और प्रहलाद जैसे बालकों ने इसी धरती की माताओं के गर्भ से जन्म लिया है। आज हमारे सनातनधर्म में परम्परागत रूप से कुछ कमियाँ आ गईं हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। माताओं, बहनों को जागने की जरूरत है, अपनी सनातनी शक्ति को पहचानने की जरूरत है। जिस तरह गंगा में अब तक अनेक नाले समाहित होकर उसे गंदा कर चुके हैं, तो गंगा को साफ करने की आवश्यकता है, उसी तरह अपने अन्दर की त्रिवेणी को इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी को पवित्र करने की, जाग्रत् करने की आवश्यकता है। फिर तुम्हारे भी गर्भ से ध्रुव, प्रहलाद जैसे बालकों का जन्म होगा और तब हमारे सनातनधर्म को कोई डिगा नहीं सकेगा।
तथाकथित धर्माचार्यों में तपबल है ही नहीं
आज के तथाकथित धर्माचार्यों में तपबल है ही नहीं और यदि है, तो मेरी साधनात्मक चुनौती को स्वीकार करें, जिससे ढोंग-पाखंड की दुकानें बन्द हो सकें। ऐसे पाखंडियों को जो धर्म के नाम पर लूट-खसोट में लगे हुए हैं, उन्हें कानून के दायरे में लाना चाहिए। यह काम सरकारों का है, लेकिन सरकारें कानों में रुई डालकर बैठी हैं। हमारे सनातनधर्म ने, हमारे ऋषियों-मुनियों ने क्या नहीं किया? उनके तपबल के कारण ही राम, कृष्ण जैसे देवपुरुषों ने इस धरती पर जन्म लिया है।
सनातनधर्म को क्षति पहुँचती रही और…

हम मानव-मानव में भेद पैदा करते रहे, जाति के आधार पर जो हीनभावना पैदा की गई, उससे सनातनधर्म को क्षति पहुँची है और धर्माचार्य केवल अपना सम्मान भोगते रहे। जो मेहनती, परिश्रमी वर्ग है, उन्हें दु:ख यही रहा कि उनको दीन-हीन समझा जाता है। यदि सनातनधर्म की रक्षा करनी है, तो सभी जाति के लोगों को गले लगाना होगा। हमें अपने सनातनधर्म को कमजोर नहीं होने देना है। आज भी कुछ समाज के लोगों को कहा जाता है कि उन्हें वेदों, धर्मग्रन्थों का ज्ञान लेने का अधिकार नहीं है और एक बहुत बड़े समाज को वेद, पुराणों के ज्ञान से वंचित रखा गया। यदि उन्हें भी इनका ज्ञान दिया गया होता, तो आज हम खण्ड-खण्ड न बटते। आज जातपात, छुआछूत की जड़ों को समाप्त करने की आवश्यकता है, तभी सनातनधर्म की रक्षा हो सकेगी। उस समाज को केवल इतना सिखाओ कि अच्छाइयों को धारण करो और बुराईयों का त्याग करो तथा स्वच्छता को महत्त्व दो।
हमारा धर्म हमें हिंसा नहीं सिखाता
हमारी इस धरती पर ज्ञानियों की कमी नहीं है, उन्होंने धर्मग्रन्थों को रट लिया है, कहीं से भी कुछ पूछ लो, वे बता देंगे कि इस पृष्ठ में यह लिखा है। लेकिन, उन्होंने उस ज्ञान का सदुपयोग नहीं किया, वे उस पथ पर चले ही नहीं, जो धर्मग्रन्थों में लिखा हुआ है, बल्कि रटन्त विद्या को सुनाकर धनअर्जन का माध्यम बना लिया। धर्मग्रन्थ हमें किस ओर बढ़ाना चाह रहे हैं? न तो उस पर स्वयं बढ़े और न ही लोगों को अच्छाईयों की ओर बढ़ाया गया। हमारा धर्म हमें साहस, शौर्य, पराक्रम, विनम्रता, भ्रातृत्व सिखाता है, लेकिन हिंसा नहीं सिखाता। हमारे देवी-देवता भी अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं, लेकिन उन्होंने उन अस्त्र-शस्त्रों का उपयोग केवल असुरत्व को समाप्त करने के लिए किया है।
भूत-प्रेत के नाम पर भय पैदा किया जा रहा है
आज अनेक स्थानों पर, धर्मपीठों पर तन्त्र-मंत्र, भूत-प्रेत, झाड़-फूँक के नाम पर तथाकथित पीठाधीश्वरों के द्वारा लोगों में भय पैदा किया जा रहा है। आज ढोंगी, पाखंडी, पर्चा बनाकर लोगों को प्रभावित करने वाले सनातनधर्म को क्षति पहुँचा रहे हैं। माइंड रीडिंग करके किसी का नाम बता देना, कुछ और बता देना, कोई सिद्धि नहीं है। यह काम तो अनेक माइंड रीडर कर सकते हैं। कुछ लोग बजरंगबली को बदनाम कर रहे हैं, जैसे कि बजरंगबली ने कहा हो कि जब तुम दरबार लगाओगे, तो मैं तुम्हारे कान में सबकुछ बता दूँगा! झूँठ, पाखण्ड फैलाकर पर्चा बनाने वालों को मैं चुनौती देता हूँ कि मेरे पीछे सैकड़ों भूत लगाकर मेरा अहित कर दो। पण्डोखर के गुरुशरण शर्मा और प्रेमासांई जैसे लोगों ने सनातनधर्म को बदनाम करके रख दिया है।
आज भी मुझमें वही शक्ति है, लेकिन चमत्कार के लिए नहीं
बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, कथा सुनाते हो, सुनाते रहो, अच्छी बात है, लेकिन यदि स्वयं को सिद्धसाधक कहते हो, तो तुम्हें ससम्मान चुनौती है कि स्वयं को सिद्ध करके दिखाओ। मैं प्रयागराज की धरती पर कहता हूँ कि जिस तरह मैंने आठ महाशक्तियज्ञों की ऊर्जा के माध्यम से असम्भव से असम्भव कार्यों को करके यज्ञों की शक्ति का अहसास समाज को कराया है, आज भी मुझमें वहीं शक्ति है, लेकिन चमत्कार के लिए मैं अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करता। हाँ, एक बार चारों शंकराचार्य एक धर्मसम्मेलन आहूत करें, जिसमें धर्मप्रमुख, वैज्ञानिक, पत्रकार व बुद्धिजीवियों, सभी को बुलाया जाए और जो कहा जायेगा, वह मैं करके दिखाऊँगा।
एक शंकराचार्य ने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से कहा कि यदि ऐसे ही चमत्कारी हो, तो जोशीमठ की दरारों को पाट दो, तो उसने कहा कि शंकराचार्य ने अपना आपा खो दिया है! अरे, हमारे शंकराचार्य तपस्वी हैं, चमत्कारी नहीं। यदि चारों शंकराचार्य शक्तिपरीक्षण के लिए सभी धर्मप्रमुखों को आहूत करके एक सम्मेलन आयोजित करें, तो मैं जोशीमठ की धसती जमीन को मात्र 11 दिन के अनुष्ठान के माध्यम से सैकड़ों वर्ष के लिए स्थिर कर दूँगा।“
सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के चेतनात्मक चिन्तन के उपरान्त सायं 04:00 बजे शिविरस्थल पर उपस्थित लाखों शक्तिसाधकों, धर्मयोद्धाओं ने आपश्री के सान्निध्य में ‘महाशक्ति शंखनाद’ किया। तत्पश्चात् सभी ने साधनाक्रम पूर्ण करके दिव्य आरती का लाभ लेते हुए परम पूज्य गुरुवरश्री की चरणपादुकाओं को नमन करते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
शिविर के द्वितीय दिवस का द्वितीय सत्र
मोह-माया, ईर्ष्या-द्वेष और अहंकार से ग्रसित विचलित बुद्धि, जब परमसत्ता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की भक्ति में, मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कर्त्तव्यों के निर्वहन में स्थिर होगी, तभी योग की प्राप्ति सम्भव है।
शिविर के द्वितीय व अन्तिम दिवस का द्वितीय सत्र, अपराह्न 01.30 बजे जयकारों और शंखनाद के बीच सद्गुरुदेव जी महाराज का प्रवचन मंच में आगमन हुआ। तत्पश्चात् शक्तिस्वरूपा बहनों ने पदप्रक्षालन के क्रम को पूर्ण किया। इस क्रम के पूर्ण होते ही कुछ शिष्यों-भक्तों ने ‘माँ’-गुरुवर के चरणों में अपने भावगीतों की प्रस्तुति दी, जिसके प्रारम्भिक अंश इस प्रकार हैं-
मुक्ता मिश्रा जी, कौशाम्बी- दृष्टिगत यह दृश्यगत जन्मों में मिले इकबार देखो, तीर्थ ख़ुद ही कर रहे हैं, तीर्थधाम सरकार देखो। वीरेन्द्र दीक्षित जी, दतिया- न हमें साधना तपबल, न हमको भक्ति आती है, न जाने कौन से गुण पर भवानी रीझ जाती हैं। शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी- वेद पढ़ो या न पढ़ो, वेदना पढ़ो जन-जन की। तीर्थ करो या न कर पाओ, करो मदद तुम दु:खियन की।। बाबूलाल विश्वकर्मा जी, दमोह- सच्चिदानंदघन तुम्हें नमन, भावों का सुमन करते अर्पन। निजतप पुरुषार्थ से रच डाला सिद्धाश्रम जैसा अगन।।
भावगीतों की शृंखला समाप्त होते ही ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज आशीर्वाद प्रदान करते हुये मन्द मृदुल मुस्कान के साथ धीर-गम्भीर वाणी में कहते हैं-

“इस शिविर का एक-एक क्षण, एक-एक पल महत्त्वपूर्ण है और यदि इन क्षणों को सार्थक बना लिया जाए, तो यह मानवजीवन उच्चता की ओर बढ़ता चला जायेगा। आप सभी लोग पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पर शारदीय नवरात्र 2022 में आयोजित 125वें शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में प्रथम चरण का ‘महाशक्ति शंखनाद’ कर चुके हैं और इससे पहले आप लोगों के द्वारा पाँच चरणों में ‘नशामुक्ति महाशंनाद’ और ‘युग परिवर्तन का महाशंखनाद’ किया जा चुका है तथा अब ‘महाशक्ति शंखनाद’ की कड़ी चल रही है।
वर्तमान काल-परिस्थितियों में जिस पथ पर मैं चल रहा हूँ, उसके अलावा और कोई पथ है ही नहीं, जिस पर चलकर समाज को दिशाधारा दी जा सके! मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि मेरे समक्ष आने वाले किसी भी व्यक्ति को, आमजनमानस को, गरीब से गरीब, दीनहीनों का जीवन जीने वालों को ग्लानि न हो। आज देखा जा रहा है कि 75 प्रतिशत धर्माचार्यों, प्रवचन कर्ताओं के मंच पर अन्यायी-अधर्मी, दुष्कर्मी व नशेड़ियों को सम्मानित किया जाता है, इससे आमजन व्यथित होता है और सनातनधर्म पर उसकी श्रद्धा का क्षय होता है। 25 प्रतिशत धर्माचार्य सत्यपथ के राही हैं, लेकिन 75 प्रतिशत ढोंग-पाखंड पैलाकर धर्म के प्रति आस्थावान लोगों का शोषण करने में लगे हुए हैं।
मेरी सम्पूर्ण व्यवस्था सत्यपथ की रही है और है। चाहे जब देख लिया जाए, जब मेरे शिविर होते हैं, तो जब तक मेरा शिविर रहता है, मैं किसी भी धनवान या राजनेता से नहीं मिलता। मेरा पथ एक साधक का पथ है और मेरे पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम में भी जब भक्त आते हैं, तो मैं इस बात का विशेष ध्यान रखता हूँ कि सबसे पहले गरीब व आमव्यक्ति से मिलूं तथा बाद में धनवान व्यक्तियों और राजनेताओं से मिलता हूँ।
हम सत्यपथ पर चल रहे हैं, तो सत्य ही हमारी रक्षा करेगा। किसी योगी, ऋषि, साधक को कभी भी दानी बनकर दान न करें और यदि कोई ऐसा करता है, तो वह महामूर्ख है। तुम उन्हें क्या दोगे? वे तुम्हें ही सबकुछ दे रहे हैं, अत: समर्पण की भावना रखो। जो व्यक्ति दानी बनकर दान करता है, वह अपने आपको श्रेष्ठ समझने लगता है। जब किसी को किसी से कुछ पाने का लोभ होता है, तो वह देने वाले की चाटुकारिता करेगा ही, जो कि आजकल के कथावाचक कर रहे हैं। मेरा कहना है कि किसी भी धर्मगुरु को, किसी भी कथावाचक को धनप्राप्ति के लिए चाटुकारिता नहीं करनी चाहिए।
अन्तर्मन से किए गए तप की, निर्मलता की पूँजी सदैव आपके साथ रहेगी, जबकि भौतिकता की पूँजी यहीं धरी रह जायेगी। परमसत्ता के विधान को समझकर स्वयं के द्वारा स्वयं को प्रकाशित करें, सत्यधर्म के पथ पर चलें, परोपकार और पुरुषार्थ के पथ पर चलें तथा कुण्डलिनीशक्ति को जगाने के लिए तप-साधना की ओर अग्रसर हों। भोजन करने से भी अधिक जरूरी है सत्कर्म करना, क्योंकि सत्कर्मों से अन्तश्चेतना जाग्रत् होती है।

भिखारीपन से ऊपर उठो, तुम स्वयं में समर्थ हो। मेहनती बनो, परिश्रमी बनो। कोई भी परिश्रमी व्यक्ति भूखों नहीं मर सकता। गरीबों की स्थिति-परिस्थिति पर चिन्तन करो। जब उनके प्रति चिन्तन करने लगोगे, तो जिनसे तुम दूर भागते हो, वही अच्छे लगने लगेंगे, उनकी सहायता करने की इच्छा जाग्रत् होगी। विचार करो कि यदि इसी तरह की स्थिति मेरी माँ, मेरे भाई की होती, तो मुझे कैसा लगता? यही विचार यदि राजसत्ताओं के होजाएं, तो भारत देश में कोई गरीब ही नहीं होता, लेकिन सभी व्यवस्थाएं बिखरी हुई हैं। केवल सोच को बदलने की जरूरत है। मगर, आजादी के बाद से हो क्या रहा है? राजनेता अपने ही घर भरने में लगे हुए हैं और इस प्रजातंत्र में देश के लोगों को शराबी बनाया जा रहा है! यह कितना बड़ा जघन्य अपराध है? इतने बड़े अपराध को माफ़ नहीं किया जा सकता।
राजसत्ताएं शराब के ठेके चलवा रहीं हैं, जिसके चलते युवा, बच्चे अपराधी बनते चले जा रहे हैं। जो राजनेता अपने ही लोगों को शराब पिलाए, वह कतई सम्मान के योग्य नहीं हो सकता। केवल देश को नशामुक्त कर दो, तो हमारा सनातनधर्म पुन: अपनी ऊँचाईयों को प्राप्त कर लेगा। छोटे लाभ के लिए शराब का धंधा करो, धिक्कार है! अरे, जीएसटी को तो लगा ही रखे हो, थोड़ा और बढ़ा दो, शराब के धंधे से प्राप्त हो रहे राजस्व की पूर्ति हो जायेगी। यदि देश को, सभी प्रदेशों को नशामुक्त नहीं किया गया, तो ये राजसत्ताएं धूल-धूसरित हो जायेंगी, क्योंकि अब जनता जाग रही है।
यद्यपि भारतीय जनता पार्टी कुछ अच्छा कार्य कर रही है, लेकिन पूरी व्यवस्थातंत्र से मैं खुश नहीं हूँ। लेकिन, यदि कांग्रेस 10-20 साल और सत्ता में रहती, तो भारत देश की हालत पाकिस्तान जैसी होजाती, चारों तरफ भुखमरी का आलम होता। आजादी के बाद वर्तमान में प्रधानमंत्री के पद पर पदस्थ नरेन्द्र मोदी अन्य प्रधानमंत्रियों की अपेक्षा बहुत अच्छे हैं, लेकिन कुछ अतिआवश्यक कार्य हैं, जिन्हें भी करने की जरूरत है, जैसे- जनसंख्या नियंत्रण, देश को नशामुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना। हमने भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का गठन, चुनाव जीतने और सत्ताप्राप्ति के लिए नहीं किया। इसका गठन इसलिए किया गया है, ताकि देश में व्याप्त अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध आवाज को मुखर किया जा सके।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कुछ अच्छा कार्य कर रहे हैं। हर व्यक्ति योगी नहीं बन सकता। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जैसे लोग योगी नहीं बन सकते, क्योंकि योगी ट्रिकबाजी नहीं करते, पर्चा बनाकर, झाड़-फूंक के नाम पर आडम्बर नहीं फैलाते। यह अच्छी बात है कि अध्यात्म क्षेत्र में युवा बढ़कर आगे आएं, समाज को कथायें सुनाएं, लेकिन छल-प्रपंच फैलाकर समाज को ठगा जाए, समाज को दिशाभ्रमित किए जाए, यह अच्छी बात नहीं है।
…गऊओं के लिए अभयारण्य बनाया जाए
राजनेता विवेकवान नहीं बन पा रहे हैं। गोरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें तो होती हैं, लेकिन गोशालाओं में क्या हो रहा है? वहाँ जाकर देखिए तो विदित होगा कि नित्यप्रति सैकड़ों गाएं भूख से तड़प-तड़पकर मर रही हैं। कहते हैं कि गाय हमारी माता है, इनमें देवी-देवताओं का वास है, लेकिन हो क्या रहा है? इससे आमसमाज अन्जान नहीं है। अरे, तुम विदेशों से चीतों को ला-लाकर के रख रहे हो, उनके रखरखाव में करोड़ों खर्च किया जा रहा है, तो क्या गऊओं के लिए अभ्यारण्य बनाने की जरुरत नहीं हैं? जितना आहार चीतों को दिया जा रहा है, क्या उतना आहार गऊओं को नहीं देना चाहिए? क्या गऊओं की सुरक्षा के लिए चीतों की तरह अलग व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती? सनातनधर्म की बात तो करते हो, तो इसकी रक्षा के लिए इतना तो कर दो कि हर ज़िले में और यदि अधिक न हो सके तो, हर प्रदेश में गऊओं के लिए अभयारण्य बना दिया जाए। मैं सभी धर्मप्रमुखों से भी कहता हूँ कि इसके लिए आवाज उठाएं। मैं अपने शिष्यों से भी चाहता हूँ कि नित्यप्रति पूजन के समय पाँच बार इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करें- ॐ श्री सुरभ्यै नमरू।“
केन्द्र में भाजपा पुन: सरकार बनाएगी
मध्यप्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और मैंने राजसत्ता को संदेश भेजा है कि मध्यप्रदेश को नशामुक्त घोषित कर दें, तो हमारी भारतीय शक्ति चेतना पार्टी पूरा समर्थन करेगी। उत्तरप्रदेश को भी यदि नशामुक्त प्रदेश बनाने की घोषणा कर दी जाए, तो उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकार को भी पूरा समर्थन दिया जायेगा। मैंने पच्चीसों वर्ष पहले घोषणा की थी कि 21वीं सदी में भाजपा की सरकार बनेगी और आज फिर इस मंच से घोषणा करता हूँ कि अगले चुनाव में भी भाजपा विजयी होकर केन्द्र में सरकार बनाएगी। चाहे पूरा विपक्ष एक होजाए, वर्ष 2024 के चुनाव में उसे मुँह की खानी पड़ेगी।
…सरकारों को आगाह किया जा रहा है

मैं आरएसएस का समर्थक हूँ, क्योंकि वह हिन्दुत्व के लिए कार्य कर रही है और भगवती मानव कल्याण संगठन के लाखों कार्यकर्ता भी इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। देश के अन्दर ऐसी कोई भी संस्था नहीं है, जो इस संगठन के समान जनकल्याणकारी कार्य कर रही हो! इस संगठन के द्वारा देश के लगभग 16-17 लाख लोगों को नशामुक्त किया गया है और 1500 से अधिक स्थानों पर शराब की अवैध खेपें पकड़ाई गईं हैं। मगर, एक भी सरकारी ठेके के विरुद्ध अभियान नहीं छेड़ा गया और शराबबन्दी के लिए केवल सरकारों को आगाह किया जा रहा है।
शराबमाफियाओं के टुकड़ों में पल रही है पुलिस
सागर संभाग में कुछ पुलिस वाले शराबमाफियाओं के टुकड़ों पर पल रहे हैं। वे संगठन के कार्यकर्ताओं को कहते हैं कि तुम लोग शराब नहीं पकड़ोगे, यह हमारा काम है। तो मैं बता दूँ कि जहाँ भी अवैध गतिविधियाँ संचालित हैं, उन पर रोक लगाने का अधिकार देश के सभी नागरिकों को है। उन्हें केवल अपने अधिकारों को जानने व समझने की जरूरत है।
हिन्दुत्व किसी की बपौती नहीं है
बागेश्वर के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि मैं कट्टर हिन्दू हूँ। अरे, हिन्दू कट्टर नहीं होता, बल्कि सबको समान रूप से लेकर चलने वाला होता है और हिन्दुत्व की रक्षा करनी है, सनातनधर्म की रक्षा करनी है, तो सबसे पहले राजसत्ताओं से कहो कि देश को नशामुक्त घोषित करें। हम सत्य के लिए आवाज उठाने वाले हैं, सत्य के लिए जीते हैं, सत्य के लिए मरते हैं और सनातनधर्म के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। सनातन को कोई मिटा सके, यह किसी के वश की बात नहीं है। सनातन और हिन्दुत्व किसी की बपौती नहीं हैं।
हम केवल जेहादियों के विरोधी हैं, इस्लाम के नहीं
हम इस्लाम के विरोधी नहीं है, क्योंकि सभी धर्म परोपकार और अहिंसा की सीख देते हैं। हाँ, हम जेहादियों के विरोधी अवश्य हैं। हिन्दुस्तान में रहो और देश के टुकड़े करना चाहो, तो यह बर्दास्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि धर्म के नाम पर आपको एक देश दे दिया गया है। हमारा विरोध ईसाइयों से है, जो गांव के गांव को, वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को ईसाई बना रहे हैं। जैसा कि धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि मैंने 250 लोगों की घरवापिसी करवाई है, तो मैं चुनौती देता हूँ कि यदि पच्चीस लोगों के भी नाम बता दें कि उनकी घरवापिसी करवाई है। केवल एक मुस्लिम महिला को खड़ा करके वाहवाही लूटने से सनातनधर्म की रक्षा नहीं होगी। अनेक मुसलमान मेरे भी दीक्षाप्राप्त शिष्य हैं, लेकिन उन्हें मैंने धर्मपरिवर्तन के लिए कभी नहीं कहा और वे केवल मेरी विचारधारा पर चलते हैं, सात्विक वेशभूषा धारण करते हैं और सात्विक भोजन करते हैं, सभी के साथ उनका मेलमिलाप है। यही तो हिन्दुत्व है।
अनेक पाखंडी पहुँचा रहे हैं सनातन को क्षति
कई वर्ष पहले से हर मंच के माध्यम से मेरे द्वारा ढोंगी, पाखंडी धर्माचार्यों की पोल खोली जा रही है। आशाराम और रामरहीम के बारे में कहा गया था कि एक न एक दिन ये जेल की सलाखों के पीछे होंगे और वही हुआ। सनातन में जहाँ भी ग़लत है, मैं आवाज उठाऊँगा। रामपाल जैसे लोग, जो सनातन के दुश्मन हैं। वह सनातन को नष्ट करने में तुला हुआ था, आवाज उठाई गई और वह भी जेल की सलाखों के पीछे है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के विरुद्ध आवाज उठाई है और उसकी दशा जो होगी, वह तो होगी ही, लेकिन रामपाल ने तो उससे हजारों गुना अधिक गल्तियाँ की हैं। ज्ञानगंगा नामक पुस्तक के माध्यम से तो उसने हमारी पूरी गीता को ही बदलने का प्रयास किया, हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया गया, गंगा की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया। ज्ञानगंगा नामक यह पुस्तक करोड़ों की संख्या में नि:शुल्क बटवाई गई, जबकि वह जेल में है। आखिर, करोड़ों-करोड़ रुपया आया कहाँ से? ऐसे अधर्मियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
पण्डोखर धाम चले जाइए, जहाँ गुरुशरण जैसे पाखण्डी बैठे हुए हैं, जिनका आपसे रिश्ता केवल पैसों का है और ऐसे लोगों को पैसा देकर ढोंग-पाखण्ड को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि हिन्दूधर्मावलम्बियों को ठगोगे, अपने कृत्य से सनातनधर्म को क्षति पहुँचाओगे, तो मैं आवाज उठाऊँगा।

युवाओं का आवाहन
युवाओं का आवाहन है कि आओ, अपनी शक्ति को पहचानो, नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन अपनाओ तथा धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा और मानवता की सेवा के लिए आगे बढ़ो। आओ इस अभियान से, सत्य की यात्रा से जुड़ो, तुम्हारा सनातनधर्म, तुम्हारे भारत का सनातनधर्म तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।“
परम पूज्य गुरुवरश्री के अमृततुल्य चिन्तन के उपरान्त, शिविरस्थल पर बैठे एक लाख से अधिक शक्तिसाधकों व भक्तों ने सायं 04:10 बजे महाशक्ति शंखनाद किया। तत्पश्चात् सभी ने साधनाक्रम पूर्ण करते हुए ‘माँ’-गुरुवर की दिव्यआरती का लाभ लिया और क्रमबद्ध रूप से गुरुचरणपादुकाओं को नमन करते हुए प्रसाद प्राप्त करके जीवन को धन्य बनाया।
सिद्धाश्रम से प्रयागराज तक विशाल नशामुक्ति शक्ति चेतना जनजागरण सद्भावना यात्रा
दिनांक 24 फ़रवरी 2023 को धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज जैसे ही पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम से प्रयागराज के लिए प्रस्थित हुये, आश्रमवासियों व भक्तों के द्वारा लगाए जा रहे जयकारों और शंखध्वनि से वातावरण गुंजायमान हो उठा था। गुरुवरश्री के वाहन के पीछे पूजनीया शक्तिमयी माता जी और शक्तिस्वरूपा बहनों के वाहन चल रहे थे और उनके पीछे सैकड़ों वाहनों में शिष्यगण चल रहे थे।

वाहन से ही आश्रमवासियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुये सद्गुरुदेव जी महाराज, सर्वप्रथम पूज्य दण्डी संन्यासी स्वामी श्री रामप्रसाद आश्रम जी महाराज की समाधिस्थल पर गये, पश्चात् त्रिशक्ति गौशाला पहुंचे, जहाँ उन्हें नमन् करने के लिये द्वार पर फूल-पत्तों से आच्छादित तोरणद्वार सजाए गोसेवक कतारबद्ध जयकारे लगाते व शंखध्वनि करते हुये खड़े थे। इन्हें आपश्री ने शुभाशीर्वाद प्रदान किया।
प्रयागराज में आयोजित द्वितीय चरण के नशामुक्ति महाशंखनाद शिविर के परिप्रेक्ष्य में प्रारम्भ नशामुक्ति शक्ति चेतना जनजागरण सद्भावना यात्रा शनै: -शनै: रीवा मार्ग पर आगे बढ़ी। परम पूज्य गुरुवरश्री की यात्रा का आभास पाकर ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में स्थान-स्थान पर शिष्यों-भक्तों द्वारा स्वागतद्वार सजाये गये थे। स्वागतद्वार के दोनों ओर आरती की थाल सजाये व ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाते खड़े शिष्यों-भक्तों और क्षेत्रीय जनमानस की आतुरता देखते ही बनती थी। महिलाओं के हाथों में दीप प्रज्वलित कलश सुशोभित हो रहे थे। ग्राम-मऊ, देवलौंद, भइसरहा, बघवार होते हुए छुहिया घाटी की दुर्गम व घुमावदार सड़क से होते हुए यात्रा गोविंदगढ़ पहुंची। बघवार और गोविन्दगढ़ में सद्गुरुदेव भगवान् की अगवानी बैण्ड बाजे व शंखध्वनि की स्वरलहरियों की बीच भव्यतम रूप से की गई। सड़क मार्ग पर स्वागतद्वार और किनारे अद्वितीय रंगोली सजाई गई थी।
सद्भावना यात्रा रीवा बायपास की ओर आगे बढ़ती है और रीवा रिंग रोड टोलनाका के पास जयकारे लगाते भक्तों की शृंखला, शंखध्वनि से समूचा क्षेत्र गूंज रहा था। रायपुर-कर्चुलियान में मार्ग के दोनों किनारे अनुशासनपूर्वक खड़े होकर शिष्यों-भक्तों और क्षेत्रीयजनों ने परम पूज्य गुरुवरश्री का दर्शनलाभ प्राप्त किया। मनगवां में यात्रा का अभूतपूर्व स्वागत किया गया, जयकारों और गुदुम व शहनाई की धुन से सम्पूर्ण वातावरण तरंगित था। हाथों में दीपप्रज्ज्वलित कलश लिए बच्चियों के चेहरों पर गुरुदेव भगवान् को देखकर विशेष प्रसन्नता अठखेलियाँ करने लगी थी।
गंगेव, गुढ़, लालगांव और बघेड़ी चौराहे में हजारों भक्त मार्ग के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाने के साथ ही शंखनाद कर रहे थे। महिला भक्तों एवं बच्चियों के हाथ में दीप प्रज्ज्वलित कलश और पुरुषों व बच्चों के हाथ में शक्तिदण्डध्वज। सुसज्जित स्वागतद्वारों की अलग ही छटा थी। मार्ग के किनारे हाथों में कलश लिए पंक्तिबद्ध खड़े प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं के बच्चों में तो अभूतपूर्व उत्साह परिलक्षित था। ऐसा लग रहा था कि ये बच्चे अध्यात्मपथ के राही बनकर अवश्य ही युग परिवर्तन में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने सभी शिष्यों-भक्तों और बच्चों को आशीर्वाद प्रदान किया।
शनै:- शनै: यात्रा चाकघाट पहुँची। भक्तों ने यहाँ पुष्पवर्षा करके परम पूज्य गुरुवरश्री का स्वागत किया। चाकघाट से उत्तरप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही यात्रा के साथ सैकड़ों मोटरसाइकिलों का काफिला जुड़ गया, जिनमें पीछे बैठे गुरुवरश्री के शिष्यों-भक्तों के हाथों में शक्तिदण्डध्वज शोभायमान थे।
मोटरसाइकिल का काफिला आगे-आगे चल रहा था, उनके पीछे सद्गुरुदेव जी महाराज, पूजनीया शक्तिमयी माता जी, शक्तिस्वरूपा बहनों और शिष्यों-भक्तों के वाहन सामान्य गति से अग्रसर थे। नारीबारी में भक्तों ने पूरे सड़क मार्ग को रंगीन झंडियों से सजा रखा था। जगह-जगह प्रयागराज महाशंखनाद शिविर के लिए जनआवाहन हेतु बैनर, पोस्टर, कट-आउट्स लगाए गए थे। फूलमालाओं से सुसज्जित स्वागतद्वार के दोनों किनारे खड़े नर-नारी, बच्चे, जिन्होंने सद्गुरुदेव भगवान् की आरती उतारी। ग्रामवासियों ने तो नशामुक्ति सद्भावना यात्रा का स्वागत, मार्ग में पुष्पों की पंखुड़ियों को बिखेरकर किया। उनके उत्साह-उमंग में अपूर्व श्रद्धाभाव परिलक्षित था। जारी में भी कुछ इसी तरह का भक्तिभाव क्षेत्रीयजनमानस और ‘माँ’के भक्तों में देखने को मिला।
यात्रा घूरपुर, चाका, नैनी होते हुए प्रयागराज की ओर आगे बढ़ी। नया यमुनापुल से बैरहना, तिकुनिया, सीएमजी डिग्री कॉलेज, मेडिकल चौराहा व पत्रिका चौराहा होते हुए गुरुआवास यात्रिक हॉटल के सामने पहुंची। नया यमुनापुल से यात्रा ने विशालस्वरूप धारण कर लिया था, क्योंकि यात्रा के साथ हजारों श्रद्धालुओं का समूह शामिल हो गया था, जो मंदगति से चल रहे परम पूज्य गुरुवरश्री के वाहन के साथ कदमताल करते हुए चल रहे थे। इस दौरान गुरुवरश्री, हजारों की संख्या में पैदल चल रहे शिष्यों-भक्तों व क्षेत्रीय जनमानस के भावों को जानकर अपने वाहन के सनरूफ में खड़े होकर दोनों हाथों से आशीर्वाद लुटाने लगे और यह क्रम विश्रामस्थल यात्रिक हॉटल तक चला। सद्भावना यात्रा का विशाल स्वरूप अत्यन्त ही मनमोहक था।
गुरुआवासस्थल यात्रिक हॉटल के पास भी हजारों की संख्या में परम पूज्य गुरुवरश्री के शिष्य व ‘माँ’के भक्त एक हाथ में शक्तिदण्डध्वज और दूसरे हाथ में शंख लिए अनुशासनपूर्वक जयकारे लगाते व शंखध्वनि करते हुए स्वागतार्थ खड़े थे और गुरुवरश्री ने सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
नशामुक्ति सद्भावना यात्रा प्रयागराज से सिद्धाश्रम तक
शिविर समापन के उपरान्त दिनांक 28 फरवरी, दिन मंगलवार को प्रात:काल 09:00 बजे ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज सिद्धाश्रम वापिसी यात्रा हेतु जैसे ही प्रयागराज स्थित गुरुआवास यात्रिक हॉटल से बाहर निकलते हैं, शिष्यों व ‘माँ’भक्तों के मुखारविन्दों से उच्चारित जयकारों व शंखनाद की प्रतिध्वनि से समूचा क्षेत्र गूंज उठा। इस विदाई बेला में अनेक शिष्यों-भक्तों की आंखें नम हो उठीं।
शक्ति चेतना जनजागरण नशामुक्ति सद्भावना यात्रा उत्तरप्रदेश के प्रयागराज स्थित यात्रिक हॉटल से सिविल लाइन्स पत्रिका चौराहा, मेडिकल चौराहा, सीएमपी डिग्री कॉलेज, तिकुनिया, बैरहना नया यमुनापुल, चाका, घूरपुर, जारी, नारीबारी, चाकघाट, सोहागी, कटरा, गढ़, गंगेव, मनगवां, रायपुर कर्चुलियान, रीवा बायपास से गोविन्दगढ़, बघवार, बाणसागर होते हुए अपराह्न 02:15 बजे पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम, पहुंची।
वापिसी यात्रा में भी सभी स्थानों पर परम पूज्य गुरुवरश्री का भव्य स्वागत किया गया और सिद्धाश्रम में तो सद्गुरुदेव भगवान् के वापस लौटने से सिद्धाश्रमवासी हर्ष से फूले नहीं समाए और जयकारे व शंखध्वनि के मध्य उनकी अगवानी की गई।
भक्तों ने दिया आत्मीयता का परिचय
नशामुक्ति सद्भावना यात्रा के दौरान भक्तों ने बघवार, रीवा, रायपुर कर्चुलियान, मनगवाँ, गंगेव, गढ़ और लालगंज आदि स्थानों पर यात्रा में चल रहे गुरुभाई-बहनों को मिष्टान्न, नमकीन, बिस्किट और पेयजल आदि देकर आत्मीयता एवं परोपकार का परिचय दिया।
शक्तिस्वरूपा बहनों के सान्निध्य में शिविरार्थियों ने सीखीं योगविधाएं
प्रथम दिवस के प्रथम सत्र की प्रात:कालीन बेला में प्रवचन पंडाल में उपस्थित सभी भक्तों ने सर्वप्रथम बीजमंत्र ‘‘माँ’और ॐ तथा चेतनामन्त्र ‘ॐ जगदम्बिके दुर्गायै नमः’ एवं गुरुमन्त्र ‘ॐ शक्तिपुत्राय गुरुभ्यो नमः’ का जाप मेरुदण्ड सीधा करते हुये आसन लगाकर मनोयोगपूर्वक किया। पश्चात् शंखघ्वनि की गई। शिविर पंडाल में उपस्थित सभी गुरुभाई-बहनों व ‘माँ’भक्तों को शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी ने अध्यात्मिक साधनाक्रमों और योगविधा की क्रियारूप में जानकारी देने के साथ ही प्राणायाम से होने वाले लाभों से अवगत कराया। इस अवसर पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन पूजा शुक्ला जी और सिद्धाश्रम चेतना आरुणी जी भी उपस्थित रहीं।
शक्तिस्वरूपा बहनों ने की दिव्यआरती

जिस दिव्यआरती के लिये देवाधिदेव भी लालायित रहते हैं, उस दिव्यआरती को शक्ति चेतना जनजागरण शिविर के दोनों दिवसों में लाखों भक्तों ने प्राप्त करके जीवन को कृतार्थ किया। शिविर के दोनों दिवसों में ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के चिन्तन के पश्चात् सायंकालीन बेला में शक्तिस्वरूपा बहन पूजा जी, संन्ध्या जी एवं ज्योति जी ने समस्त भक्तों की ओर से दिव्यआरती सम्पन्न की। उस समय का वातावरण अत्यन्त ही भक्तिमय था। गुरुवरश्री की ध्यानावस्थित मुद्रा और प्रवाहित चेतनातरंगों से शिविर में पहुंचे सभी भक्तों का रोम-रोम पुलकित हो उठा था।
शिविर व्यवस्था में दिन-रात लगे रहे संगठन के हजारों कार्यकर्ता
शिविर के विशाल आयोजन को सम्पन्न कराने में देश-देशान्तर से पहुंचे भगवती मानव कल्याण संगठन के पाँच हजार से भी अधिक कार्यकर्ताओं ने दिन-रात अथक परिश्रम करके सभी व्यवस्थाओं को भव्य व संतुलित स्वरूप प्रदान किया। उनकी सक्रियता और सतर्कता का ही परिणाम था कि शिविर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं के ठहरने हेतु जहाँ आवासीय पण्डाल व्यवस्था प्रदान की, वहीं शिविर के दोनों दिवस सुबह-शाम लाखों भक्तों को निरूशुल्क भोजन कराया। मंच व पंडाल की व्यवस्था, जनसम्पर्क कार्यालय, स्टॉल व्यवस्था, खोया-पाया विभाग व निरूशुल्क चिकित्सा केन्द्र की व्यवस्था के साथ ही प्रसाद वितरण के कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।




